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Wednesday, August 15, 2018

उपन्यास लिखने में तीन साल और नाट्य रूपांतरण में लगे ढाई साल

जबलपुर। शहर में लगातार हो रहे रंगमंच को एक और नई दिशा देने के उद्देश्य से विवेचना रंगमंडल, महाकोशल शिक्षा प्रसार समिति, महाकोशल शहीद स्मारक ट्रस्ट के साथ ही गोविंदराम सेक्सरिया शिक्षा मंडल द्वारा 15 व 16 अगस्त को महानाट्य पानीपत का मंचन किया जा रहा है। शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में ढाई घंटे के इस नाटक का मंचन शाम 7 बजे से किया जाएगा। विश्वास पाटिल के उपन्यास पर आधारित नाटक का नाट्य रूपांतरण शिक्षाविद और लेखिका वसुधा सहस्त्रबुद्घे ने किया है। नाटक का निर्देशन अरुण पांडे कर रहे हैं। नाटक के बारे में यह जानकारी शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में आयोजित पत्रकारवार्ता में दी गई। जहां नाटक के लेखक विश्वास पाटिल ने मौजूद रहकर पानीपत उपन्यास से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया।
लेखक विश्वास पाटिल ने बताया कि वे एक किसान परिवार से हैं। उनके पिता चौथी पास हैं और मां अनपढ़ हैं। अपने आसपास की चीजों को देखकर, इतिहास की किताबों को पढ़कर उन्हें लिखने की प्रेरणा मिली। लिखने के लिए मन से इच्छा को होना बहुत जरूरी है। लेखक ने बताया कि जब वे 25 साल के थे तब पानीपत लिखना शुरू किया था और 28 साल की उम्र में पानीपत उपन्यास पूरा कर पाए। विश्वास पाटिल ने बताया लोगों ने पानीपत नाम के लिए कहा कि यह अशुभ है। उपन्यास का यह नाम मत रखिए। लेकिन मैंने कहा कि नाम तो पानीपत ही रहेगा जिऊंगा तो पानीपत के साथ मरूंगा तो पानीपत के साथ।
विश्वास पाटिल ने बताया कि उपन्यास 800 पन्नों था जिसका नाट्य रूपांतरण करने में लगभग ढाई साल लगे। मराठी में इसके 700 शो हो चुके हैं। जबलपुर में विवेचना रंगमंडल द्वारा हिंदी में पहला मंचन हो रहा है। लेखक विश्वास पाटिल ने बताया कि प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए भी उन्होंने निरंतर लेखन कार्य किया। इसका ही परिणाम है कि सुभाषचंद्र बोस पर लिखे उपन्यास'महानायक' को काफी सराहा गया। बाढ़ पीड़ितों की परेशानियों पर लिखे उपन्यास के लिए मुझे साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत भी किया गया।
नाटक में झलकती देशभक्ति को नई पीढ़ी व अन्य लोगों के सामने लाना ही नाटक का मुख्य उद्देश्य है। नाटक में पेशवा भाऊ साहेब के साथ मराठों की कहानी को बताया गया। लगभग 1 घंटा 50 मिनट के महानाट्य में लगभग 70 कलाकार शामिल हो रहे हैं। नाटक की कहानी के अनुसार कलाकारों को युद्घ कौशल में पारंगत करने के लिए अमित सुदर्शन मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दे रहे हैं। संगीत के लिए मराठी संगीतकारों का सहयोग लिया जा रहा है।

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